Tuesday, November 25, 2008

यह आख़री सलाम मेरा तेरे नाम है

कर ले क़ुबूल इस को यह मेरा सलाम है
यह आख़री सलाम मेरा तेरे नाम है

रुख्ह्सत के वक़्त पलकें भीगने की रस्म क्यूँ
बाबुल के घर को छोर ना बेटी का काम है

यदोण के साये रौशनी होने ना देंगे अब
यह ज़िंदगी हमारी अंधेरों के शाम है

वो नज़्म हो कह मेरी गाज़ल सब तेरे लिए
जब से कितब.ए दिल पे लिखा तेरा नाम है

यह मेरा काम था कह बनाया है आशियाना
अब बिजलियाँ गिराना फलक तेरा काम है

क्या अब बही उसकी याद के बाक़ी हैं कुछ निशान ?
यह फिर ज़ुबान पे तेरे जोनीराका नाम है

Thursday, November 20, 2008

तुम्हारी कसम मैं नहीं जानती

ज़ीवन किस मोड़ पर ले जा रहा है नहीं जानती
एक सपना आंखों में भर कर चल पड़ी हूं
मन्ज़िल कहां है क्या है ठिकाना? नहीं जानती.

चाहत की सीड़ी पर पांव तो रख दिये हैं
सुनहरे रंग कि चुनर ओड़ ली है सनम
किस्मत मुझे कहं कहां ले जायेगी? नहीं जानती.

सावन के झूले सजा लिये हैं पेड़ों पर
बारिष की बूंदे तन को भिगो रही हैं
तमन्नायें पूरी भी होंगी? नहीं जानती.

पलकों में तुमको बसा लिया है जानम
प्यार में खुद को डुबो दिया है सनम
ज़िन्दगी की ये शाम क्या हसीन होगी? नहीं जानती

छोटा सा घरोंदा बना लिया है तेरे संग
ख़्वाबों की नाव उतार दी है समुन्दर में
सहिल पा भी जाऊंगि कभी? नहीं जानती

आंखें बहुत छोटी हैं सपने बहुत बड़े
सोचती हूं आंखों में इनको भरे भरे .
ये सच है क्या सोचती हूं नहीं जानती

कौन बड़ा है नीरा का नीर या सपनो की तहरीर
कौन ज़्यादा है कौन कम नहीं जानती
तुम्हारी कसम मैं नहीं जानती

जो पाए वो रोए जो खोए वो रोए

कान्हा की याद में राधा भी रोए
मीरा भी रोए,
सपने दोनो ने एक्सूंग संजोए
राधा ने पाए मीयर्रा ने खोए
जो पाए वो रोए जो खोए वो रोए

दोनो ने प्रीत की झोली फैलाई
कोई ने पाया साथ कान्हा का
भक्ति में कोई रात भर रोए
राधा भी रोए मीरा भी रोए.
जो पाए वो रोए जो खोए वो रोए

मीरा बन बन भटके मिलन को
राधा किश्ना सुंग झूले
दर्शन पनेको कान्हा के
राधा भी रोए मीरा भी रोए.
जो पाए वो रोए जो खोए वो रोए

Friday, November 14, 2008

पर कोई कफ़न पहना कर चला गया

दोस्तों के काई रंग रूप देखें हैं
किसी ने हमे लूटा है,
कोई हुमारे लिए लूट गया है.
चाहत में फ़र्क है सब के.
कोई ने दुआ दी है,
तो
कोई बाद दुआ दे गया है.

किसी ने हम से प्यार किया,
तो
कोई हुमारा दिल तोड़ गया है.
किसी ने हमे खुशियाँ दी, तो कोई हुमारी
मुस्कुराहट ही छीन गया है.

किसी ने राह में बिछाए हैं.
तो कोई कांटे चूबो गया है.
किसी ने रैत के घर बना कर दिए.
कोई घर को ही रूंध गया.

किसी ने किश्ती में घूमाया.
कोई किश्ती ही डूबो गया.
किसी ने दुल्हन बनने का सपना दिखाका.
पर कोई कफ़न पहना कर चला गया

Wednesday, November 12, 2008

काँटे तो चुभते रहते हैं.

फूलों के साथ काँटे होते हैं
फूलों में खुश्बू होती है
काँटे तो चुभते रहते हैं.

फूलों की किस्मत होती है
कुछ तो मंदिर चढ़ते हैं
कुछ अर्थी पर रोते हैं

बनते हैं कभी दुल्हन की सेज
तो कभी तवायफ़ के हाथों में
बनके गजरा महकते हैं

कभी घर को सुंदर बनाते हैं
दिलों में खुश्बू फैलाते हैं
तो कभी पैरों की रौंदन होते है

तलाश


यह आनसूँ ना जाने किसकी याद में
चालक आएँ हैं.
जाने इस को किसकी तलाश है,
सुबा की रोशनी में आँखें चारों ओर
एक चेहरा तलाशती है.
दिल की धड़कन किसी की आवाज़ को तरसती है.
आरज़ू जगाए अंधेरोन में चिराग जला लेती है
फिर नयी तलाश शुरू हो जाती है.

बचपन से सूनते हैं
जोड़िए आकाश में बनती हैं
हात बदाकार खुद ढूंड लेती हैं.
यह बातें किताबी ही लगती हैं
मान की कहानी लगती है.
सब झूटी सब झूटी हैं
आँख हमारी आज भी रोती
हर ओर आँखे प्यार में बरसती है

चकोर चाँद को तरसती
कोयल बारिश को तड़पति
लहराएँ मौजों पर लहराती
साहिल से मिलने को तरसती हैं
मेरी रूह की तरह भटकती हैं.
मारी रूह की तरह भटकती हैं
फिर नयी तलाश शुरू करती है

यह सितम भूलने में वक़्त तो लगेगा

हाल- दिल बताने में वक़्त तो लगेगा
दास्तान सुनने में वक़्त तो लगेगा

दिल मिले हैं फिर भी मैं तुझ से दूर रहती हून
यार आने जाने में वक़्त तो लगेगा

घुल्शन.ए मोहब्बत को खून- दिल से सींचा है
गुल शजार पे आने में वक़्त तो लगेगा

हम से तुम ने रिश्तों की डोर बाँध रखखी थी
हुमको भूल जाने में वक़्त तो लगेगा

दरमियाँ हमारे हैं बेशुमार दीवारें
अब इन्हें गिराने में वक़्त तो लगेगा

तिनका तिनका लाना है चुनके सारे गुलशन से
आशियाँ बनाने में वक़्त तो लगेगा

हम पे इस ज़माने ने ज़ुल्म ही किएनीरा
यह सितम भूलने में वक़्त तो लगेगा