Friday, November 14, 2008

पर कोई कफ़न पहना कर चला गया

दोस्तों के काई रंग रूप देखें हैं
किसी ने हमे लूटा है,
कोई हुमारे लिए लूट गया है.
चाहत में फ़र्क है सब के.
कोई ने दुआ दी है,
तो
कोई बाद दुआ दे गया है.

किसी ने हम से प्यार किया,
तो
कोई हुमारा दिल तोड़ गया है.
किसी ने हमे खुशियाँ दी, तो कोई हुमारी
मुस्कुराहट ही छीन गया है.

किसी ने राह में बिछाए हैं.
तो कोई कांटे चूबो गया है.
किसी ने रैत के घर बना कर दिए.
कोई घर को ही रूंध गया.

किसी ने किश्ती में घूमाया.
कोई किश्ती ही डूबो गया.
किसी ने दुल्हन बनने का सपना दिखाका.
पर कोई कफ़न पहना कर चला गया

7 comments:

श्यामल सुमन said...

अजब खेल हो रहे थे अजब खेल हो रहे हैं।
मेरा घर जलाने वाले मेरे साथ रो रहे हैं।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com

डॉ .अनुराग said...

udaasi hai kaafi !

प्रदीप मानोरिया said...

बहुत सरल शब्दों से सजी आपकी यथार्थ परक शायरी है बधाई समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर भी दस्तक दे

"Nira" said...

अजब खेल हो रहे थे अजब खेल हो रहे हैं।
मेरा घर जलाने वाले मेरे साथ रो रहे हैं।।

shayam ji
aapko yahan dekhkar khushi huyi
meri kavita pasand aayi dilse abhari hoon
dhanyawaad

"Nira" said...

Anurag ji
aapka bahut bahut shukriya
yunhi hi aate rahiyega.

"Nira" said...

बहुत सरल शब्दों से सजी आपकी यथार्थ परक शायरी है बधाई समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर भी दस्तक दे

pradeep ji
aapko yahan dekhkar khushi huyi
meri kavita pasand aayi dilse abhari hoon
dhanyawaad
zaroor chakar maroongi aapke blog par

अवाम said...

सुंदर रचना. जीवन में दोनों तरह के लोग मिलते है. कोई प्यार देता है तो कोई दुःख..